हिंदू धर्म के प्रसिद्ध चार धामों में से एक बद्रीनाथ धाम भगवान
विष्णु का निवास स्थल माना जाता है। यह भारत के उत्तरांचल राज्य में
अलकनंदा नदी के तट पर नर-नारायण नामक दो पर्वतों के बीच बसा है। बद्रीनाथ
धाम से कई धार्मिक और पौराणिक कथाएं जुड़ी हुई हैं, जो इस जगह को और भी खास
बनाती हैं।
जानें बद्रीनाथ धाम से जुड़ी 7 अनोखी बातें...
यहीं लिखी थीं वेदव्यास ने महाभारत
मान्यताओं है कि, बद्रीनाथ ही वो जगह है, जहां वेदव्यास ने हिंदू धर्म
के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण ग्रंथ यानी महाभारत की रचना की थी। बद्रीनाथ
क्षेत्र में एक गुफा है, जिसे महाभारत की रचनास्थल माना जाता है।
भगवान विष्णु की तपस्या स्थली
पुराणों के अनुसार, बद्रीनाथ धाम की स्थापना सतयुग में हुई थी। इस जगह
को भगवान विष्णु की तपोभूमि माना जाता है। भगवान विष्णु ने कई सालों तक इस
जगह पर तपस्या की और वे ही यहां के पालनहार हैं।
कैसे पड़ा इस जगह का नाम बद्रीनाथ
शकंराचार्य को मिली थीं यहां की मूर्ति
कैसे पड़ा इस जगह का नाम बद्रीनाथ
कहा जाता है कि भगवान विष्णु ने इस जगह पर कठोर तपस्या की, जब देवी
लक्ष्मी ने बदरी यानी बेर का पेड़ बन कर सालों तक भगवान विष्णु को छाया दीं
और उन्हें बर्फ आदि से बचाया। देवी लक्ष्मी के इसी सर्मपण से खुश होकर
भगवान विष्णु ने इस जगह को बद्रीनाथ नाम से प्रसिद्ध होने का वरदान दिया।
शकंराचार्य को मिली थीं यहां की मूर्ति
मान्यताओं के अनुसार, यहां स्थापित भगवान विष्णु की मूर्ति सबसे पहले
आठवीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य को यहां के एक कुंड में मिली थी। जिसे
उन्होंने एक गुफा में स्थापित कर दिया था। बाद में राजाओं द्वारा वर्तमान
मंदिर का निर्माण करवा कर मूर्ति को इस मंदिर में स्थापित किया गया।
ऐसा है यहां की विष्णु मूर्ति का स्वरूप
बद्रीनाथ धाम के गर्भगृह में भगवान विष्णु की चतुर्भुज मूर्ति स्थापित
है, जो कि शालिग्राम शिला से बनी है। यहां की मूर्ति बहुत ही छोटी है,
जिसे हीरों के जड़ा हुआ मुकुट पहनाया जाता है। यहां पर भगवान विष्णु के साथ
भगवान कुबेर और उद्धव जी की भी मूर्तियां स्थापित हैं।
हर समय गर्म रहता है यहां के कुंड का पानी
अलकनंदा नदी के किनारे तप्त नामक एक कुंड है। इस कुंड का पानी हर समय
गर्म ही रहता है, जो की किसी चमत्कार के कम नहीं। यह कुंड चमत्कारी होने के
साथ-साथ बहुत पवित्र भी माना जाता है। इस कुंड में स्नान करने पर भक्त
पापों से मुक्ति पाते हैं।
यहां बहती है गंगा के बारह स्वरूपों में से एक अलकनंदा
कहा जाता है कि जब गंगा का धरती पर अवतरण हुआ, तब धरती गंगा का वेग
सहने में असमर्थ थीं, इसलिए गंगा ने अपने आप को बारह भागों में बांट कर
अलग-अलग जगहें बहने लगीं। अलकनंदा नदी गंगा के उन्हीं बारह भागों में से एक
है। इसी के किनारे बद्रीनाथ धाम बसा हुआ है।




