महाशिवरात्रि के मौके पर शिवालयों में रात-रात भर विशेष पूजा अनुष्ठान किए
जाते हैं। देशभर में शिवजी के कई अद्भुत मंदिर हैं। हर मंदिर के निर्माण की
अपनी कहानी है। ऐसा ही एक मंदिर है ककनमठ, जो एमपी के ग्वालियर जिले में
है। लोगों की मान्यता है कि इसका निर्माण एक रात में भूतों ने किया था।
- यह मंदिर एमपी के ग्वालियर शहर से करीब 60 किमी दूरी पर है।
- यह मंदिर एमपी के ग्वालियर शहर से करीब 60 किमी दूरी पर है।
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मंदिर को लेकर एक किंवदंती है कि इसे भूतों ने एक रात में बनाया था।
बनाते- बनाते सुबह हो गई और भूतों को काम अधूरा छोड़कर जाना पड़ा।
- आज भी इस मंदिर को देखने यही लगता है जैसे इसका निर्माण अधूरा छोड़ दिया गया हो।
- हालांकि, भूतों जुड़ी कथा को लेकर कोई दावा नहीं किया जा सकता, पर मंदिर करीब 1000 साल पुराना है।
- कई तो प्रमाणिक रूप से यह भी कहते हैं कि इसका निर्माण कछवाहा राजवंश के राजा कीर्तिराज के कार्यकाल के दौरान हुआ था।
पत्नी की इच्छा पूरी करने बना मंदिर
- कहते हैं कि कीर्तिराज ने रानी ककनवती की इच्छा को पूरा करने के लिए 11वीं शताब्दी में मंदिर का निर्माण कराया गया था।
- ककनमठ मंदिर के निर्माण में कहीं भी चूने-गारे का उपयोग नहीं किया गया।
- मंदिर की ऊंचाई 115 फीट है। मंदिर के गर्भ गृह में विशाल एवं अद्भुत शिवलिंग स्थापित है।
- ककनमठ मंदिर उत्तर भारतीय शैली में बना है।
कैसे पहुंचे
- मंदिर जाने के लिए ग्वालियर शहर से सिहोनिया गांव पहुंचना पड़ता है, ये करीब 60 किमी दूरी है।
- इस स्थान पर पहुंचने के लिए भिंड और मुरैना दोनों ही मार्ग का उपयोग कर सकते हैं।
कब जाएं
- श्रावण मास और शिवरात्रि में यहां जाने का ज्यादा महत्व होता है।
- शिवरात्रि पर यहां दूर-दूर से भक्त आते हैं।
- बरसात के मौसम में यह इलाका बेहद ख़ूबसूरत दिखाई देता है।




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