Thursday, 13 August 2015

परशुराम महादेव मंदिर



हम बता रहे हैं एक ऐसे शिव मंदिर की कहानी जिसे राजस्थान का अमरनाथ कहा जाता है। हम बात कर रहे हैं परशुराम महादेव मंदिर के बारे में जो उदयपुर के कुंभलगढ़ में दुर्गम पहाड़ियों के गुफा में स्थित है। वही परशुराम जिन्होंने गुस्से में आकर मां रेणुका का वध कर दिया था।
गुफा की चट्टान को काटकर भगवान परशुराम ने बनाया था मंदिर
कहा जाता है कि हजारों बार इस धरती से क्षत्रियों का नाश करने वाले परशुराम के पास अद्भुत शक्ति यहीं की देन है। इस गुफा मंदिर के अंदर एक स्वयं भू शिवलिंग है जहां पर विष्णु के छठे अवतार परशुराम ने भगवान शिव की कई वर्षो तक कठोर तपस्या की थी। ऐसी भी मान्यता है कि जहां पर यह शिवलिंग स्थापित है उस गुफा की चट्टान को खुद परशुराम ने अपने फरसे से काटकर बनाया था।
राजस्थान के अमरनाथ के नाम से है प्रसिद्ध

दुर्गम पहाड़ी, घुमावदार रास्ते, प्राकृतिक शिवलिंग, कल-कल करते झरने एवं प्राकृतिक सौंदर्य से ओत-प्रोत होने के कारण भक्तों ने इसे राजस्थान के अमरनाथ का नाम दे दिया है। राजस्थान में मेवाड़ और मारवाड़ के लिए यह स्थान किसी तीर्थ से कम नहीं। शायद यही वजह है कि हर साल लोग यहां सावन में भारी संख्या में भगवान के दर्शन करने आते हैं। खास बात यह है कि सावन के दिनों में मंदिर के चारों ओर का नजारा इतना मनोरम होता है मानो गुफा में बैठे भगवान परशुराम खुद प्रकृति की गोद में बैठ गए हों।

3600 फुट ऊंचाई पर बना है परशुराम महादेव मंदिर
यहां अपने तप से भगवान परशुराम ने प्राप्त की थी शक्ति- माना जाता है कि समुद्र तल से 3600 फुट ऊंचाई पर बने परशुराम महादेव मंदिर को विष्णु अवतार भगवान परशुराम ने बनाया है। दंभ और पाखंड से धरती को त्रस्त करने वाले क्षत्रियों का संहार करने के लिए भगवान परशुराम ने इसी पहाड़ी पर स्थित स्वयंभू शिवलिंग के समक्ष बैठकर तपस्या की थी। जिसके बाद उन्हें वो शक्ति मिली जिसका तोड़ किसी अन्य के पास नहीं था। परशुराम ने अपने फरसे से पहाड़ी को काटकर एक गुफा का निर्माण किया जिसमें स्वयंभू शिव विराजमान हैं, जो अब परशुराम महादेव के नाम से जाने जाते हैं।

यहां मिली थी परशुराम को माता की हत्या के पाप से मुक्ति
यहां से कुछ दूर सादड़ी क्षेत्र में परशुराम महादेव की बगीची है। गुफा मंदिर से कुछ ही मील दूर मातृकुंडिया नामक स्थान है जहां परशुराम को मातृहत्या के पाप से मुक्ति मिली थी। इसके अलावा यहां से 100 किमी दूर पर परशुराम के पिता महर्षि जमदगनी की तपोभूमि है।
यहां परशुराम ने कर्ण को दी थी शिक्षा
 इस स्थान से जुडी एक मान्यता के अनुसार भगवान बद्रीनाथ के कपाट वही व्यक्ति खोल सकता है जिसने परशुराम महादेव के दर्शन कर रखे हो। इसी जगह पर परशुराम ने दानवीर कर्ण को शिक्षा दी थी।

अपने फरसे से किया राक्षस का वध
 फरसे द्वारा काटकर बनाई गई गुफा में स्थित मंदिर में अनेकों मूर्तियां, शंकर, पार्वती और स्वामी कार्तिकेय की बनी हुई हैं। इसी गुफा में एक शिला पर एक राक्षस की आकृति बनी हुई है। जिसे परशुराम ने अपने फरशे से मारा था। परशुराम महादेव से लगभग 100 किमी दूर महर्षि जमदगनी की तपोभूमि है, जहां परशुराम का अवतार हुआ।
यहां शिवलिंग अभिषेक के बाद दूध अपने आप हो जाता है गायब
पाली नगर से लगभग 35 किमी दूर दक्षिण-पश्चिम दिशा में शाली का पहाडिय़ों में स्थित गुफा मंदिर में जमदगनी ऋषि ने तपस्या की थी। जलप्रपात के नजदीक गुफा में विराजे स्वयंभू शिवलिंग की प्रथम प्राण प्रतिष्ठा परशुराम के पिता जमदगनी ने ही की थी। शिवलिंग पर एक छिद्र बना हुआ है जिसके बारे में मान्यता है कि इसमें दूध का अभिषेक करने से दूध छिद्र में नहीं जाता जबकि पानी के सैकड़ों घड़े डालने पर भी वह नहीं भरता और पानी शिवलिंग में समा जाता है।

एक ही चट्टान में बनी है पूरी गुफा-
 हैरतअंगेज वाली बात यह है कि पूरी गुफा एक ही चट्टान में बनी हुई है। ऊपर का स्वरूप गाय के थन जैसा है। प्राकृतिक स्वयं-भू लिंग के ठीक ऊपर गोमुख बना है, जिससे शिवलिंग पर अविरल प्राकृतिक जलाभिषेक हो रहा है। मान्यता है कि मुख्य शिवलिंग के नीचे बनी धूणी पर कभी भगवान परशुराम ने शिव की कठोर तपस्या की थी।
कहां स्थित है यह मंदिर
 परशुराम महादेव का मंदिर राजस्थान के राजसमन्द और पाली जिले की सीमा पर स्तिथ है। मुख्य गुफा मंदिर राजसमन्द जिले में आता है जबकि कुण्ड धाम पाली जिले में आता है। पाली से इसकी दुरी करीब 100 किलोमीटर और विशव प्रसिद्ध कुम्भलगढ़ दुर्ग से मात्र 10 किलोमीटर है।

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